
“ जंगल में खूनी तांडव: महुआ बीनने गए ग्रामीणों पर भालू का जानलेवा हमला, दो गंभीर”
मुंगेली/लोरमी। जिले के लोरमी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम चेचानडीह में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब महुआ बीनने जंगल गए ग्रामीणों पर एक जंगली भालू ने अचानक हमला कर दिया। इस खौफनाक घटना में दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें हालत नाजुक होने पर जिला अस्पताल मुंगेली रेफर किया गया है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों में भय व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम चेचानडीह के तीन ग्रामीण रोज की तरह सुबह महुआ संग्रह के लिए जंगल की ओर गए थे। जंगल में महुआ बीनने के दौरान अचानक झाड़ियों के बीच से निकले एक भालू ने उन पर हमला बोल दिया। हमला इतना अचानक और उग्र था कि ग्रामीणों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
हमले के दौरान एक महिला ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचा ली, लेकिन गेंदलाल गोंड़ और उनका एक साथी भालू के हमले की चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि भालू ने दोनों पर बेहद आक्रामक तरीके से हमला किया, जिससे उनके शरीर के कई हिस्सों में गहरे जख्म हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों घायल बुरी तरह लहूलुहान हो गए थे।
घटना के तुरंत बाद परिजनों और ग्रामीणों ने घायल दोनों व्यक्तियों को लोरमी स्थित 50 बिस्तर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉ. परमेश्वर कश्यप ने प्राथमिक उपचार किया। दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें तत्काल जिला अस्पताल मुंगेली रेफर कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
इस घटना के बाद चेचानडीह सहित आसपास के गांवों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि महुआ सीजन शुरू होते ही जंगलों में भालुओं की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग द्वारा न तो कोई पूर्व चेतावनी जारी की जाती है और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाते हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जंगल क्षेत्र में नियमित गश्त नहीं होने के कारण जंगली जानवर बेखौफ होकर गांवों के नजदीक तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। उन्होंने वन विभाग से तत्काल गश्त बढ़ाने, प्रभावित क्षेत्र में निगरानी तेज करने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
इधर, घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया है। विभागीय टीम को मौके के लिए रवाना किया गया है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ग्रामीणों को जंगल में अकेले न जाने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
हालांकि, लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं—क्या हर बार हादसे के बाद ही वन विभाग जागेगा? क्या ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पहले से कोई ठोस रणनीति नहीं है? फिलहाल, लोरमी क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग जंगल की ओर जाने से डर रहे हैं।
















